भारत कृषि प्रधान देश है |देखा जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही आधारित है| हमारे देश में  आर्थिक असंतुलन बहुत ज्यादा है |जबकि भारत में जाति तौर पर लोगों को आरक्षण दिया गया ,जिसका कोई फायदा नहीं है ; क्योंकि  आरक्षण  जातिगत है  |

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किसान को देश का अन्नदाता कहा जाता है |हमारी देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए एक ही उपाय है ;महिलाओं बच्चों तथा विशेषकर किसान का आर्थिक स्तर उठाया जाए |किसान की आर्थिक स्थिति को भी राजनीतिक फायदे के लिए प्रयोग किया जाता है | किसानों की हालत खस्ता होने पर देश का अन्नदाता सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण सड़कों पर उतर आया है | किसानों की माली हालत होने के कारण ही किसान संगठनों ने 1 जून से सड़कों पर उतर कर आंदोलन करने का फैसला लिया है |32 मांगों के समर्थन में जैसे कि कर्जमाफी ,स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने को लेकर पूरे उत्तर भारत -पंजाब ,राजस्थान ,मध्य प्रदेश, हरियाणा ,महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश  के किसान सड़कों पर उतर आए हैं |जिसमें किसानों ने फैसला लिया है के कोई भी उग्रकार्य नहीं किया जाएगा |बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से अपने हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को जारी रखा जाएगा |किसान संगठनों ने फैसला लिया है कि उनके द्वारा पैदा किए गए उत्पाद जैसे कि दूध ,सब्जियां शहर में सप्लाई नहीं की जाएंगी |जैसा कि हम जानते हैं कि किसानों की फसलों का रेट लागत मूल्य से भी कम मिल पाता है |जिसका कारण है के किसान को सब्जियों का दाम 10 परसेंट भी नहीं मिलता है जब के व्यापारियों द्वारा बेढंगे तरीके से कमाई की जाती है |

किसानों के हिमायती डॉ अशोक तंवर,भाई रमेश भादु , भाई सुखविंदर सिंह तथा भाई भजन लाल तथा अन्य सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने किसान भाइयों का साथ देकर शांतिपूर्ण ढंग से किसानों को अधिकार दिलवाने के फैसला लिया है|

हमारा देश महान है |भारत में एक से एक राजनीतिक पार्टियों का प्रचलन है |इस देश के महान नेताओं द्वारा एक से बढ़कर एक बयान बाजी की जाती है |जिसमें यह नहीं देखा जाता के उनके द्वारा बोला गया कोई भी शब्द किसी को ठेस तो नहीं पहुंचा रहा; उदाहरण के तौर पर देखा जाए के हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर ने ऐसा बयान दिया, जिससे किसानों के दिलों पर गहरी ठेस पहुंची |उन्होंने कहा कि इस आंदोलन से किसान लोग अपना ही नुकसान कर रहे हैं खट्टर का कहना है कि किसानों का मकसद मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींचना है |श्रीमान खट्टर के बयान से यह साबित होता है कि इस देश का किसान भी आज सेलिब्रिटी बनना चाहता है| बल्कि मेरे देश के किसानों के लिए ऐसा अनुचित शब्द कहना बहुत ही गलत होगा| किसानों को हक दिलवाने के लिए राष्ट्रीय किसान संघ के बैनर तले 110 तथा किसान एकता मंच के बैनर तले 62 किसानों के संगठनों ने सरकार की अनापेक्षित नीतियों को विरोध करने के लिए 1 जून से 10 जून तक आंदोलन करने का निर्णय लिया है  |किसान संगठनों द्वारा 1 जून से 10 जून तक गांव बंद का जो ऐलान किया गया है |उसमें निर्णय लिया गया है कि गांव के किसी भी उत्पाद को शहर में नहीं जाने दिया जाएगा |1 जून शुक्रवार को किसानों के आंदोलन का असर खासकर 7 राज्यों में दिखाई दिया |जब के इस बंद के दौरान कोई हिंसक घटना नहीं हुई |कुछ संगठन इस आंदोलन के पक्षधर नहीं है |क्योंकि उनका मानना है कि इस आंदोलन से किसानों का ही सबसे पहले नुकसान होगा |अभी तक किसान संगठनों के प्रायोजकों ने बताया के आंदोलन को प्रभावी रूप से प्रयोग में लाया जाएगा |जिसके चलते राज्यों की स्थिति देखते हुए राज्य सरकारों ने पुलिस प्रशासन तैनात करने का फैसला लिया है |पुणे में किसानों ने टोल प्लाजा पर 40000 लीटर दूध को पानी में बहा दिया और सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रदर्शन जारी रखा |पंजाब में भी बहुत जगह पर आंदोलन का प्रभाव काफी दिखाई दिया| वर्ष 2006 में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को तत्कालीन यूपीए सरकार ने स्वीकार कर लिया था |उसके बाद NDA सरकार में इसमें कुछ सुधार करके लागू करने की बात बोल कर चुनावी जुमले पर छोड़ दिया | किसान आंदोलन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गये है |1जून से 10 जून तक किसान अलग अलग ढंग से आंदोलन करेंगे |जैसे 1 से 4 जून तक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा| 5 जून को धिक्कार दिवस मनाकर 6जून से 7 जून को शहादत दिवस मनाया जाएगा| 8 व 9 जून को असहयोग दिवस और 10 जून को भारत बंद का आह्वान किया जाएगा।

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