विश्व पर्यावरण दिवस 2018 पर्यावरण दो शब्दों परया+वरण से मिलकर बना है जिसका अर्थ है परी – चारों तरफ आवरण , यानी प्रकृति में जो भी हमारे चारों ओर घिरा होता ह| जैसे की मृदा, पेड़-पौधे, प्राणी ,वायु इत्यादि | यह सभी हमारे पर्यावरण के अंग हैं |इन सब चीजों से मिलकर ही पर्यावरण की रचना होती है

हमारे  पर्यावरण के भीतर दूषित पदार्थों के प्रवेश करने के कारण प्राकृतिक संतुलन में होने वाले  दोष को प्रदूषण कहते हैं |सन 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ के पराक्रम के द्वारा स्टॉकहोम (स्वीडन ) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण दिवस आयोजित किया गया |जिसमें दुनिया के 119 देशों के लोगों ने भाग लिया तथा उस समय एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया गया |इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का जन्म हुआ| तथा उसके बाद से ही पर्यावरण दिवस 5 जून को आयोजित कर के नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का संकल्प लिया गया| दोस्तों मानव ही एक ऐसा प्राणी है जो अपनी उत्पत्ति से लेकर आज तक प्रकृति पर अपना एकाधिकार जमाने में अपनी कोशिशें जारी रखे हुए हैं |जिसमें विज्ञान का बहुत बड़ा सहारा है| विश्व भर के वैज्ञानिकों ने एक से एक बढ़कर चमत्कारी आविष्कार किए परंतु इस पृथ्वी पर रहने वाले मानव ने उनका अच्छे ढंग से उपयोग न करके दुरुपयोग बहुत ज्यादा किया तथा प्राकृतिक पर्यावरण को भूलने की गलती कर बैठा |जिसके परिणाम स्वरुप इस ब्रह्मांड का पूरा पर्यावरण दूषित होता चला गया| इन्हीं कारणों के चलते इंसान बहुत सारी समस्याओं और बीमारियों को न्योता दे चुका है |यहां तक कि अपनी जान को जोखिम में डाल चुका है| इस वर्ष 2018 में विश्व पर्यावरण दिवस पर दुनिया में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की प्रतिज्ञा ली गई जो कि हम सब ने मिलकर करना है| यहां तक के प्लास्टिक के बहुत सारे लाभ हैं यह सस्ता , हल्का और टिकाऊ होता है| यहां तक के बनाने में भी बहुत आसान है| इसी वजह से  प्लास्टिक के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है| प्लास्टिक का कचरा हमारे द्वारा उत्पन्न सभी कचरे का 10 परसेंट है| हम प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण से बचाव के लिए बढ़-चढ़कर आगे आने की चेष्टा करेंगे | यहां तक कि  बच्चे ,बूढ़े नर ,नारी ,शिक्षित हो या अशिक्षित, शहर वासियों या गांव वासी इससे निजात पाने के लिए हम अपने दिल से कार्य करना उचित समझेंगे| इसके लिए हमे शपथ लेनी होगी के परिवार के बड़े सदस्य प्लास्टिक का उपयोग ना करें ;साथ ही दूसरों को भी ज्ञान दें कि प्लास्टिक हमारे जीवन में बहुत ज्यादा बुरे प्रभाव लाने वाला है |यहां तक कि हम गांव, मोहल्ले ,शहर सभी जगह जा जाकर इस चीज का प्रचार करेंगे कि प्लास्टिक को हमारी जिंदगी से दूर जाना होगा; यदि हम अपनी जिंदगी को अच्छे ढंग से जीने की इच्छा रखते हैं| जब हम बाजार में कुछ भी सामान की खरीदारी करने जाते हैं तो अपने साथ अपना साथ कपड़े से निर्मित थैला लेकर जाएं |जिससे दुकानदार को प्लास्टिक का बैग प्रयोग करने से रोका जा सके |यदि मेरे देश भारत में और दुनिया भर में प्लास्टिक के सामान का प्रयोग करना बंद कर देंगे तो इसकी जरूरत अपने आप प्रतिदिन, दिन कम होती चली जाएगी और एक दिन हमारा सपना साकार हो जाएगा |प्लास्टिक से होने वाली बीमारियां खत्म हो जाएगी| जैसे कि प्लास्टिक का प्रयोग ही बंद हो जाएगा तो पर्यावरण प्रदूषण मुक्त हो जायेगा| पर्यावरण को लेकर हमारे देश भारत के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री हर्षवर्धन जी तथा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख Ericsson थीम ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस की 2018 की मेजबानी भारत करेगा |हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस का आयोजन किया जाता है| पिछले साल 5 जून 2017 को कनाडा देश ने मेजबानी की थी |1987 में केवल एक पृथ्वी मानकर ‘वीट प्लास्टिक पोलूशन’ का नारा देकर विभिन्न देशों में हर वर्ष 5 जून को इस कार्यक्रम को मनाने का निश्चय किया गया| जिसे विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में हर साल मनाया जा रहा है तथा 5 जून 2018 को भारत की मेजबानी करेगा |पूरी दुनिया में यहां तक के सभी देशों में इस कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है| पर्यावरण दिवस को मनाने का एक ही उद्देश्य है इस प्रकृति में पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रदूषण की रोकथाम करना| इस कार्य को करने के लिए देश की सरकार या फिर वहां के मंत्रिमंडल ही काफी नहीं है , बल्कि पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए हर देश के हर नागरिक को जागरुक होना होगा |पर्यावरण दिवस को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण शुद्धि करना यह हम सब का फर्ज है |इसे मनाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर अशोक तंवर भाई रमेश भादू भाई सुखविंदर सिंह सामा तथा विभिन्न लोगों ने इस कार्यक्रम में सहयोग देने का भी निश्चय लिया है |पर्यावरण दिवस एक प्रतीकात्मक समारोह नहीं है बल्कि यह एक हमारा उद्देश्य मिशन है| विश्व भर में समुद्र में प्रदूषण पर चिंता जताते हुए हमारे विश्व के महान बुद्धिजीवियों ने चेताया कि हमें प्राकर्तिक चीजों को बनाए रखते हुए प्लास्टिक तथा प्रदूषण करने वाले अन्य अवशेषों से बचना होगा |बुद्धिजीवियों ने बताया कि जब प्लास्टिक के टुकड़ों को छोटे टुकड़ों मे तोड़ा जाता है तो यह अवशेष समुद्र में मिल जाता है जिसे मछलियां खा जाती हैं| मछलियां द्वारा प्लास्टिक खाने के बाद जब हम मछली को खाते हैं तो वह प्लास्टिक हमारे शरीर में चला जाता है |जो कि हमारे शरीर के लिए बहुत ही खतरनाक है |

भारत के पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन जी ने लोधी रोड पर स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में एक नई मिशन की शुरुआत की| जिसके तहत बिजली  से चार्जिंग करने की सुविधा प्रयोग में लाई गई |यह भारत में यूएन के कार्यालय में दी गई इस तरह की पहली बार की पहली सुविधा है| संयुक्त राष्ट्र कार्यालय बिजली चार्जिंग करने की तकनीक की पहली सुविधा है जो भारत में यूएन कार्यालय में लगाई गई है

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