मेरा भारत महान देश है| इसमें हमेशा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बनाई जाती है |जिसमें जनता द्वारा जनता के लिए  अपने नेताओं को चुना जाता है,जो देश की सरकार चलाते हैं| बल्कि जनता की चुनी हुई सरकार जानता की बात ही नहीं सुनती है| तब जन आंदोलनों की जरूरत पड़ती है | जैसा कि हरियाणा प्रदेश में काफी लंबे समय से आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर , नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के कर्मचारी, होमगार्ड के जवान तथा विभिन्न विभागों के कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए आंदोलन किए गए| कई बार आशा वर्करों द्वारा सरकार के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किए गए |जिसके फलस्वरुप फरवरी 2018 में समझौता हुआ|यह आशा वर्करों तथा सरकार के बीच में जो समझौता हुआ था, उसका कोई प्रभाव दिखाई नहीं दिया|

जैसा के समझौते के अनुरूप कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई|  जिसकी वजह से हरियाणा की लगभग 22000 से ज्यादा आशा वर्कर्स खफा है| कोई अधिसूचना जारी नहीं होने से हरियाणा प्रदेश में आशा वर्करों द्वारा काफी लंबे समय से चल रही हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने का रविवार शाम को फैसला किया गया| जिसमें निश्चय किया गया कि आंदोलनरत कर्मचारी 15 जून को विश्वासघात दिवस मनाएंगे तथा जिला मुख्यालयों पर  गिरफ्तारियां देकर जेल भरेंगे| सीटू एवं सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित यूनियन की राज्य अध्यक्ष प्रवेश व महासचिव सुरेखा ने बताया कि आशा वर्कर्स हरियाणा में सरकार के खिलाफ 7 जून से हड़ताल पर जारी है| फरवरी 2018 में हुए समझौते को लागू कराने के लिए संघर्ष कर रही हैं; जबकि इससे पहले भी आशा वर्कर्स हरियाणा में सरकार के खिलाफ 16 दिन से अधिक तक आंदोलन कर चुकी हैं| रोजाना आशा वर्कर्स द्वारा विधायकों तथा सांसदों के निवास स्थान पर प्रदर्शन किए जाएंगे। 3000 से अधिक पंचायतों से अपने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करवाए हैं। इन प्रस्तावों को 15 जून को जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा । सामाजिक कार्यकर्ता सुखविंदर सिंह ने बताया के आशा वर्कर्स ने फैसला लिया है कि जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाएगा तब तक आशा वर्कर्स की हड़ताल जारी रहेगी;  जिसके परिणाम स्वरुप स्वास्थ्य सेवाओं व टीकाकरण में काफी दिक्कतें भी आ रही हैं। इस आंदोलन में आमजन ने आशा वर्करों का सहयोग देने का फैसला किया है। जिसमें बहुत सारे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सहयोग देने का वचन दिया है राज्य सरकार में अभी जो नोटिफिकेशन जारी करने का फैसला किया है उसमें 3000 की फिक्स बढ़ोतरी पर 2000 की कैपिंग लगा दी गई है अर्थात ₹4000 उसी आशा वर्कर को मिलेंगे, जिसका परफोरमा महीने में ₹2000 या इससे ऊपर का बनता है ।जिसका मतलब यह हुआ कि जिस वर्कर का  परफोरमा ₹2000 से कम बना,उसे पहले की तरह ही हजार रुपए मिलेंगे। प्रोत्साहन राशि में केवल सामान्य डिलीवरी पर सो रुपए की बढ़ोतरी हुई है। बाकी किसी भी इंसेंटिव में बढ़ोतरी नहीं है। समझौता 1 फरवरी को हुआ था जब कि यह अधूरा नोटिफिकेशन सरकार ने 1 अप्रैल से लागू करने की बात की है। यह सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की आशा वर्करों के साथ दगाबाजी है। यह नोटिफिकेशन आशा वर्कर्स को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। जिसके परिणाम स्वरुप सुरेखा कुमारी राज्य महासचिव आशा वर्कर ने बताया कि यह हड़ताल तभी वापस होगी, जब 1 फरवरी को हुआ समझौता पूरी तरह से लागू करने के लिए सरकार राजी हो जाएगी।

अधिक जानकारी के लिए विजिट करें swarnimsavera.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.