विधायक भावना बोहरा ने विधानसभा में धान खरीदी और भुगतान में विसंगति, गर्भवती माता और शिशु के पोषण, पेंशन एवं कम्प्यूटर ऑपरेटरों के बकाया वेतन भुगतान का उठाया मुद्दा
विधायक भावना बोहरा ने विधानसभा में धान खरीदी और भुगतान में विसंगति, गर्भवती माता और शिशु के पोषण, पेंशन एवं कम्प्यूटर ऑपरेटरों के बकाया वेतन भुगतान का उठाया मुद्दा
आज विधानसभा सत्र के दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने जनहित व किसानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न किया। उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी व भुगतान में अनियमितता,गर्भवती माता और शिशु के पोषण, वृद्धा एवं विधवा और दिव्यांग पेंशन तथा धान खरीदी केन्द्रों में कंप्यूटर ऑपरेटरों के बकाया भुगतान तथा प्रदेश में कुपोषण व क्षयकारी बच्चों की गंभीर समस्या के विषय में प्रश्न किया।
भावना बोहरा ने पूछा कि 15 नवंबर 2025 से राज्य में शुरू हुई धान खरीदी नीति के तहत, कुल कितना मीट्रिक टन धान खरीदा गया है और 3,100 प्रति क्विंटल की दर से कितने किसानों के खाते में एकमुश्त राशि का अंतरण किया जा चुका है? जिलेवार जानकारी देवें । डिजिटल क्रॉप सर्वे और ई-केवाईसी (e-KYC) सर्वर में तकनीकी खराबी के कारण कितने किसान अपना पंजीकरण नहीं करा पाए हैं या उन्हें टोकन मिलने में विलंब हुआ है? राज्य सरकार द्वारा सीमावर्ती राज्यों से आने वाले अवैध धान को रोकने के लिए सीमा पर अब तक क्या कार्यवाही की गई है? क्या विभाग उन बिचौलियों की सूची पटल पर रखेगा जिनके विरुद्ध मंडी अधिनियम के तहत पिछले 2 महीनों में कार्यवाही की गई है? जिसके लिखित उत्तर में खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल जी ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 15 नवंबर 2025 से राज्य में शुरू हुई धान खरीदी नीति के तहत कुल 141.04 लाख मेट्रिक टन की खरीदी की गई है। किसानों को समर्थन मूल्य की राशि धान कॉमन हेतु राशि रूपए 2369 तथा धान ग्रेड- ए हेतु राशि रूपए 2389 प्रति क्विंटल की दर से किसानों के खाते में भुगतान किया गया है। तकनीकी सुविधा का उपयोग करते हुए किसानों के द्वारा धान बिक्री हेतु पंजीयन कराया गया तथा उनको नियमानुसार टोकन प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार द्वारा सीमावर्ती राज्यों से लगने वाले जिलों में चेकपोस्ट बनाया गया था तथा मंडी अधिनियम के तहत कोचिए एवं बिचौलियों के विरूद्ध कार्यवाही की गई है।
भावना बोहरा ने पूछा कि क्या समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों के 108 खरीदी केंद्रों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटरों से कार्य लिया गया, परंतु उन्हें निर्धारित अवधि का मानदेय/वेतन भुगतान नहीं किया गया? यदि हाँ, तो संबंधित ऑपरेटरों को अब तक वेतन भुगतान न होने के क्या कारण हैं तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों/एजेंसी के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई है? क्या हड़ताल की स्थिति समाप्त होने के पश्चात उक्त आउटसोर्सिंग ऑपरेटरों से लगभग 15 दिनों तक कार्य लेने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं? क्या शासन द्वारा प्रभावित उक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों को उनका बकाया भुगतान शीघ्र दिलाने एवं भविष्य में इस प्रकार की स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने हेतु कोई ठोस निर्देश या नीति जारी करने का विचार है? जिसके लिखित उत्तर में खाद्य मंत्री जी ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों के खरीदी केंद्रों में पूर्व में कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर हड़ताल में होने के कारण आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से जिला कलेक्टर से समन्वय कर कंप्यूटर ऑपरेटरों से कार्य कराया गया। आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को निर्धारित अवधि का मानदेय वेतन भुगतान हेतु विपणन संघ कार्यालय को देयक/बिल प्रस्तुत नहीं किया गया है। शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान उपार्जन हेतु जारी नीति की कंडिका 11.3 अनुसार समितियों द्वारा जिलों द्वारा कम्प्यूटर आपरेटरों से कार्य कराया गया। धान खरीदी नीति 2025-26 में आवश्यक प्रावधान किया गया है।
भावना बोहरा ने प्रदेश वृद्धजनों, विधवा एवं दिव्यांगजनों को मिलने वाले पेंशन के सन्दर्भ में प्रश्न किया कि कबीरधाम जिले में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन एवं दिव्यांग पेंशन के अंतर्गत कुल कितने हितग्राही पंजीकृत हैं तथा वर्तमान में कितने प्रकरण स्वीकृति हेतु लंबित हैं? लंबित पेंशन प्रकरणों के निराकरण हेतु सरकार द्वारा क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है तथा इसके लिए क्या विशेष अभियान या कार्ययोजना बनाई गई है? क्या सरकार द्वारा वृद्धजनों, विधवाओं एवं दिव्यांगजनों को पेंशन स्वीकृति एवं भुगतान प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने हेतु कोई ऑनलाइन या विशेष व्यवस्था लागू की गई है? जिसके लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी ने बताया कि कबीरधाम जिले में सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं में पंजीकृत वृद्ध, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन के कुल 82,844 हितग्राही हैं जिनमें से कवर्धा विधानसभा में 38000 एवं पंडरिया विधानसभा में 44, 844 हितग्राही हैं। वर्तमान में पेंशन स्वीकृति हेतु कोई भी प्रकरण लंबित नहीं है। पेंशन योजनाओं में स्वीकृति एवं पेंशन राशि के भुगतान को सरल तथा पारदर्शी बनाने हेतु समस्त प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया गया है। हितग्राही स्वयं अथवा लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। स्वीकृति एवं भुगतान भी ऑनलाइन होती है। हितग्राहियों के डाटाबेस भारत सरकार के NSAP पोर्टल में संधारित है। केन्द्रीय योजनाओं की पेंशन राशि का भुगतान भारत सरकार के रिजर्व बैंक खाते से सीधे हितग्राहियों के खाते में तथा राज्य योजनाओं की पेंशन राशि का भुगतान राज्य स्तरीय नोडल खाते से हितग्राहियों के खाते में DBT द्वारा किया जाता है।
गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को पोषण आहार के विषय में भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि क्या कबीरधाम जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा 0 से 6 वर्ष के बच्चों को वितरित किए जाने वाले पोषण आहार की आपूर्ति, गुणवत्ता एवं वितरण में अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हुई हैं? यदि हाँ, तो विगत तीन वर्षों में पोषण आहार से संबंधित कितनी शिकायतें प्राप्त हुई हैं, कितने प्रकरणों की जांच कराई गई है तथा कितने मामलों में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है? क्या आंगनबाड़ी केंद्रों में मानक से कम गुणवत्ता निर्धारित मात्रा से कम सामग्री अथवा कागजों में वितरण दिखाकर वास्तविक वितरण नहीं किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई है? उक्त प्रकरणों में दोषी पाए गए अधिकारियों/कर्मचारियों, ठेकेदारों अथवा स्व-सहायता समूहों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई है, कितनी राशि की वसूली की गई है तथा कितने मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है? जिसके लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बतया कि कबीरधाम जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों में हितग्राहियों को प्रदाय किये जा रहे पोषण आहार संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है। विगत 03 वर्षो में विधानसभा क्षेत्र पंडरिया में पोषण आहार संबंधी 02 शिकायते प्राप्त हुई है तथा दोनो प्रकरणों की जांच कराई गई। जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई। कवर्धा विधानसभा क्षेत्र से संबंधित जानकारी निरंक है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण आहार मानकों, गुणवत्ता एवं कागजो में वितरण दिखाकर वास्तविक वितरण नहीं किए जाने संबंधी शिकायत निरंक है।
कुपोषण के आंकड़ों और क्षयकारी बच्चों की गंभीर स्थिति के विषय में उन्होंने प्रश्न पूछा कि क्या जून, 2025 के पोषण ट्रैकर आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में क्षयकारी बच्चों का प्रतिशत 7.77 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 5.46 प्रतिशत से काफी अधिक है? यदि हाँ, तो इसका प्रमुख कारण क्या है? मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत पिछले एक वर्ष में पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की जांच हेतु कितने प्रयोगशाला परीक्षण किए गए हैं और उनमें से कितने नमूने मानक स्तर के पाए गए हैं? क्या विभाग द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि करने का कोई प्रस्ताव बजट 2026-27 में शामिल किया गया है? जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्री ने बताया कि क्षयकारी के प्रमुख कारणों में जन्म के तुरंत बाद स्तनपान न कराना व 06 माह बाद भी स्तनपान के अलावा ऊपरी आहार न देना, प्रोटीन की कमी, स्वच्छता संबंधी सकारात्मक आदतों का अभाव, आर्थिक कठिनाई, शिक्षा एवं जागरूकता का अभाव, बार-बार संक्रमण बीमारियां जैसे दस्त, मलेरिया, निमोनिया, खसरा आदि समय से पहले बच्चे का जन्म, माता पिता में जागरूकता व पोषण संबंधी ज्ञान की कमी बताया।

