श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन भिलाई में 16 एवं 17 अगस्त 2025 को अत्यंत हर्ष और उमंग के साथ सम्पन्न हुआ

श्री राधा कृष्ण सेवा समिति, छत्तीसगढ़ की ओर से यह सूचित किया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन राधा कृष्ण मंदिर, कोसानगर टोल प्लाजा, भिलाई में 16 एवं 17 अगस्त 2025 को अत्यंत हर्ष और उमंग के साथ सम्पन्न हुआ।
डॉ. जय प्रकाश यादव के मार्गदर्शन में आयोजित इस दो दिवसीय उत्सव में नगरवासियों ने परिवार सहित उत्साहपूर्वक भाग लिया और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की भक्ति एवं सांस्कृतिक गरिमा का आनंद लिया।
पहले दिन (16 अगस्त 2025) की प्रमुख झलकियाँ –
• भजन संध्या में भक्ति रस की गंगा बहती रही तथा श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर झूमते रहे।
• पांडवानी की संगीतमय प्रस्तुति ने महाभारत की गाथाओं को जीवंत कर दिया।
• लोकसंस्कृति कार्यक्रमों ने छत्तीसगढ़ी धरा की पारंपरिक छवि को सबके सामने रखा।
• साथ ही, रात्रि 8 बजे आयोजित पत्रकार रत्न सम्मान में क्षेत्रीय पत्रकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु सम्मानित किया गया।
दूसरे दिन (17 अगस्त 2025) की प्रमुख झलकियाँ –
• तिहार लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोक कलाकारों ने अपनी समृद्ध संस्कृति का प्रस्तुतीकरण किया।
• भव्य दही हांडी प्रतियोगिता ने युवाओं में अद्भुत उत्साह जगाया।
• समापन अवसर पर छत्तीसगढ़ी फिल्मी सितारों का कला सम्मान समारोह आयोजित हुआ, जिससे कार्यक्रम में जनसंपृक्ति और भी सजीव हो उठी।
दोनों ही दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों तथा सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी रही। समस्त आयोजन भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का अनुपम संगम बनकर संपन्न हुआ।
श्री राधा कृष्ण सेवा समिति एवं डॉ. जय प्रकाश यादव ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉक्टर जय प्रकाश यादव ने कहा कि सभी श्रद्धालुजनों, भक्तों और समाज के सम्मानित सदस्यों का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूँ। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव केवल पर्व नहीं, यह दिव्य प्रेरणा है कि जीवन में प्रेम, करुणा और धर्म को सर्वोच्च स्थान मिले।
हमारे आराध्य श्रीकृष्ण ने गीता में कर्मयोग का संदेश दिया – कर्म करो और परमात्मा पर विश्वास रखो। इसी भाव से राधा कृष्ण सेवा समिति ने यह दो दिवसीय आयोजन किया है, जिसमें भक्ति, संगीत और संस्कृति की अविरल धारा बहकर हर हृदय को पवित्र करती रही।
आज मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूँ कि आपने इस उत्सव को सफल बनाया। आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि समाज में प्रेम, सहयोग और सद्भाव बनाएँगे और भक्ति के दीपक से परिवार, नगर और राष्ट्र को आलोकित करेंगे।
जय श्रीकृष्ण!” श्री मोहन सुंदरानी (वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता/अतिथि उद्बोधन)
“प्रिय भाईयों और बहनों,इस पुण्य अवसर पर यहाँ आकर मैं धन्य अनुभव कर रहा हूँ। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हमें याद दिलाता है कि जब भी अन्याय और अंधकार संसार में बढ़ता है, तब दिव्य शक्ति मार्गदर्शन करती है। कान्हा ने माखन चुराकर केवल खेल नहीं किया, बल्कि यह सिखाया कि सादगी और हँसी से जीवन को हल्का बनाओ।
इस मंदिर और समिति ने छत्तीसगढ़ की मिट्टी में भक्ति और संस्कृति का जो संगम प्रस्तुत किया है, वह अनोखा है। मैं आयोजनकर्ताओं को बधाई देता हूँ और यही आशीष देता हूँ कि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस भक्ति परंपरा को जीवंत बनाए रखें।
जय हो वंशीवाले की, जय श्रीकृष्ण!”
श्री राकेश पांडेय (अध्यक्ष, हस्तशिल्प बोर्ड, छत्तीसगढ़) का उद्बोधन
“आप सबको जन्माष्टमी की मंगलकामनाएँ।
आज का यह भव्य आयोजन केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा की अमूल्य धरोहर का स्मरण है। जैसे श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों के साथ मिलकर हर संकट का सामना किया, वैसे ही हमें भी सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाना है।
मैं विशेष रूप से कहना चाहूँगा कि हमारी लोककला और हस्तशिल्प भी कृष्ण की लीलाओं की तरह हमारे जीवन को सजाती और संवारती है। छत्तीसगढ़ की इस सांस्कृतिक धरती से संदेश जाए कि कला और अध्यात्म दोनों मिलकर जीवन को सुंदर बनाते हैं।
समिति को साधुवाद, और सभी भक्तों को शुभकामनाएँ कि श्रीकृष्ण का आशीर्वाद हर कदम पर आपके साथ रहे।
जय कन्हैया लाल की!”

