अनुसूचित जाति वर्ग से देश के प्रथम सोलर ऊर्जा उद्यमी बने समीर डाहरे

कुसुम योजना के तहत किसानों को मिली नई पहचान — आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल। 

Bhilai/- प्रधानमंत्री कुसुम योजना (कंपोनेंट-A) ने किसानों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार किया है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर देना तथा उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य के जिला बालोद, तहसील गुण्डरदेही, ग्राम सिकोसा निवासी समीर डाहरे (B.E.-Civil), पिता सांवला राम डाहरे (पूर्व विधायक-अहिवारा) ने अपने कृषि भूखंड पर 0.5 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर इतिहास रच दिया है।

समीर डाहरे देश के अनुसूचित जाति (सतनामी) वर्ग से प्रथम किसान हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड को प्रतिमाह बिजली विक्रय करना प्रारंभ किया है। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गौरव की बात है बल्कि देशभर के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन चुकी है।

समीर डाहरे ने कहा कि —

> “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुसुम योजना ने हमें आत्मनिर्भर बनने की दिशा दिखाई है। अब मैं अपनी भूमि से स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न कर देश की सेवा कर रहा हूं और अपने माता-पिता का सहारा बनकर परिवार का पालन-पोषण कर पा रहा हूं। इस योजना ने समाज के हर वर्ग को समान अवसर प्रदान किया है।”

समीर डाहरे ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि —

> “देश और प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए जिस दृष्टि और संवेदनशीलता के साथ योजनाएं चलाई हैं, वह वास्तव में ऐतिहासिक है। कुसुम योजना ने गांवों में नई उम्मीद की किरण जगाई है।”

समीर डाहरे का यह कदम न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि संपूर्ण भारत के किसानों के लिए हरित ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुका है।

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